ज्यादा पानी वाले पौधों को कैसे ठीक करें

मिट्टी सुखाएं, सड़ी जड़ों को काटें, और पानी देने की आवृत्ति कम करें।

  1. पानी देना तुरंत बंद करें. सबसे पहले पौधे को पानी देना पूरी तरह से बंद कर दें। गमले को ऐसी जगह रखें जहां अच्छी हवा आती हो और सीधी धूप न आती हो। अगर पौधा बाहर है तो उसे छाया में ले आएं।
  2. अतिरिक्त पानी निकालें. गमले के नीचे की तश्तरी में जमा पानी को तुरंत फेंक दें। गमले को थोड़ा तिरछा करके अतिरिक्त पानी को निकलने दें। अगर मिट्टी में बहुत ज्यादा पानी है तो गमले के किनारों को हल्के से दबाकर पानी को बाहर निकालने की कोशिश करें।
  3. मिट्टी की जांच करें. उंगली को मिट्टी में 2-3 इंच तक दबाकर देखें कि कितनी नमी है। अगर मिट्टी बिल्कुल गीली है तो पौधे को गमले से निकालना पड़ सकता है। मिट्टी से तेज बदबू आ रही हो तो जड़ सड़ने का संकेत है।
  4. पौधे को गमले से निकालें. पौधे को सावधानी से गमले से निकालें। जड़ों को धीरे से हिलाकर अतिरिक्त मिट्टी हटाएं। जड़ों का रंग देखें - स्वस्थ जड़ें सफेद या क्रीम रंग की होती हैं, सड़ी हुई जड़ें काली या भूरी होती हैं।
  5. सड़ी जड़ों को काटें. साफ कैंची या ब्लेड से सड़ी हुई जड़ों को काट दें। केवल स्वस्थ, मजबूत जड़ों को ही रखें। कटाई के बाद जड़ों को हल्के से सुखाएं और दालचीनी पाउडर लगाएं क्योंकि यह प्राकृतिक एंटी-फंगल है।
  6. नई मिट्टी तैयार करें. गमले को साफ करके सूखने दें। नई, अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी तैयार करें। बगीचे की मिट्टी में कोकोपीट, रेत या पर्लाइट मिलाएं ताकि पानी आसानी से निकल जाए। गमले के तल में छोटे पत्थर या टूटे घड़े के टुकड़े डालें।
  7. पौधे को दोबारा लगाएं. पौधे को नए गमले में नई मिट्टी के साथ लगाएं। जड़ों के चारों ओर हल्के से मिट्टी दबाएं लेकिन ज्यादा कसकर न दबाएं। पौधे को उसी गहराई में लगाएं जितनी पहले थी।
  8. सही देखभाल शुरू करें. नए लगाए गए पौधे को तुरंत पानी न दें। 2-3 दिन बाद हल्का पानी दें। इसके बाद मिट्टी के ऊपरी हिस्से के सूखने का इंतजार करके ही पानी दें। पौधे को उज्ज्वल लेकिन अप्रत्यक्ष धूप में रखें।