कम जगह में खीरा उगाने के लिए ऊर्ध्वाधर बागवानी कैसे करें

ऊर्ध्वाधर बागवानी में खीरे की बेलों को जाली, खंभे या ट्रेलिस के सहारे ऊपर की तरफ बढ़ाया जाता है जिससे कम जगह में अधिक उत्पादन मिलता है।

  1. उपयुक्त किस्म का चुनाव. खीरे की चढ़ने वाली किस्में जैसे जापानी खीरा, लौकी खीरा या देसी लम्बी किस्म चुनें। छोटी झाड़ी वाली किस्में इस विधि के लिए उपयुक्त नहीं हैं। बीज खरीदते समय पैकेट पर 'climbing' या 'vining' type लिखा होना चाहिए।
  2. सहारे की संरचना तैयार करें. 6-8 फीट ऊंचा बांस का या लकड़ी का खंभा गाड़ें या धातु की जाली लगाएं। खंभों के बीच की दूरी 4-6 फीट रखें। मजबूत प्लास्टिक की जाली या नायलॉन के तार से सपोर्ट नेटवर्क बनाएं। संरचना इतनी मजबूत हो कि भरे फलों का भार सह सके।
  3. मिट्टी की तैयारी. खीरे के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी तैयार करें। मिट्टी में कम्पोस्ट या सड़ी गोबर की खाद मिलाएं। मिट्टी का pH 6.0 से 7.0 के बीच होना चाहिए। गमले का उपयोग कर रहे हैं तो कम से कम 20 लीटर क्षमता वाला चुनें।
  4. बुवाई और प्रारंभिक देखभाल. खीरे के बीज को सहारे के ठीक नीचे 1-2 इंच की गहराई में बोएं। बीजों के बीच 12 इंच की दूरी रखें। नियमित पानी दें लेकिन जलभराव न करें। अंकुरण के बाद कमजोर पौधों को हटा दें और मजबूत पौधे रखें।
  5. बेल को सहारे से बांधना. जब पौधा 6 इंच का हो जाए तो इसकी मुख्य बेल को धीरे से सहारे से बांधें। नरम कपड़े या प्लास्टिक टाई का उपयोग करें। हर 15 दिन में नई शाखाओं को सहारे से बांधते रहें। बेल को बहुत कसकर न बांधें क्योंकि यह बढ़ते समय मोटी होती है।
  6. छंटाई और प्रशिक्षण. जमीन से 2 फीट की ऊंचाई तक की साइड शूट्स को काट दें ताकि मुख्य बेल को ऊपर बढ़ने की शक्ति मिले। ऊपर की शाखाओं में 2-3 पत्ते छोड़कर टिप को काट दें। रोगग्रस्त या पीली पत्तियों को तुरंत हटाएं।
  7. नियमित देखभाल और सिंचाई. सुबह-शाम पानी दें और मिट्टी को नम रखें। फूल आने पर 15 दिन के अंतराल पर जैविक खाद दें। कीड़े-मकोड़ों के लिए नीम का तेल छिड़कें। फलों को तोड़ते रहें ताकि नए फल आते रहें।