हर मौसम में लैवेंडर उगाने की संपूर्ण गाइड

लैवेंडर को किसी भी जलवायु में उगाया जा सकता है बशर्ते आप सही किस्म चुनें, अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी तैयार करें और ठंडे इलाकों में सर्दियों की सुरक्षा प्रदान करें।

  1. अपने इलाके के लिए सही लैवेंडर किस्म चुनें. ठंडे इलाकों में इंग्लिश लैवेंडर (लैवेंडुला अंगुस्टिफोलिया) लगाएं जो -20°C तक सह सकता है। गर्म और नम इलाकों में फ्रेंच लैवेंडर (लैवेंडुला स्टोइकास) या स्पैनिश लैवेंडर (लैवेंडुला डेंटाटा) चुनें। बहुत गर्म इलाकों में हाइब्रिड किस्में जैसे ग्रोसो या प्रोवेंस बेहतर काम करती हैं।
  2. मिट्टी तैयार करें. लैवेंडर को रेतीली, अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी चाहिए जिसका पीएच 6.5-7.5 हो। भारी मिट्टी में 30% रेत और 20% कंकड़ मिलाकर ड्रेनेज बेहतर बनाएं। उठी हुई क्यारी बनाना बेहतर विकल्प है। मिट्टी में कंपोस्ट की पतली परत मिलाएं लेकिन ज्यादा खाद न दें।
  3. सही जगह और समय का चुनाव. पूरे दिन धूप मिलने वाली जगह चुनें - कम से कम 6-8 घंटे सीधी धूप जरूरी है। पौधे लगाने का सबसे अच्छा समय बसंत में अंतिम पाला जाने के बाद या शरद ऋतु में पहले पाले से 6-8 सप्ताह पहले है। पौधों के बीच 60-90 सेमी की दूरी रखें।
  4. पौधे लगाने की प्रक्रिया. गमले के आकार से दोगुना चौड़ा और उतना ही गहरा गड्ढा खोदें। पौधे की जड़ों को हल्का सा फैलाएं यदि वे गमले में सिकुड़ गई हों। पौधे को उसी गहराई पर लगाएं जितना गमले में था। गड्ढा भरकर हल्का सा दबाएं और तुरंत पानी दें।
  5. पानी देने की सही विधि. शुरुआती 2-3 सप्ताह रोज हल्का पानी दें। फिर सप्ताह में 2 बार गहराई तक पानी दें। एक बार स्थापित हो जाने पर केवल मिट्टी सूखने पर ही पानी दें। बारिश के मौसम में पानी कम या बंद कर दें। हमेशा जड़ों में पानी दें, पत्तियों पर नहीं।
  6. नियमित देखभाल और कटाई-छंटाई. फूल आने के तुरंत बाद तनों को एक तिहाई काट दें। सर्दी के अंत में पुरानी लकड़ी को काटकर नई शाखाओं को बढ़ावा दें। रोज मुरझाए फूलों को हटाते रहें। महीने में एक बार जैविक खाद दे सकते हैं लेकिन ज्यादा उर्वरक न दें।
  7. सर्दियों की सुरक्षा. ठंडे इलाकों में पौधे के आधार पर सूखी पत्तियां या भूसा बिछाएं। गमले वाले पौधों को घर के अंदर या ग्रीनहाउस में ले आएं। बहुत ज्यादा ठंड में बर्लैप या प्लास्टिक शीट से ढक दें। सर्दी में पानी बिल्कुल कम दें।