तोरी की सफल खेती कैसे करें
तोरी की सफल खेती के लिए धूप वाली जगह, उपजाऊ मिट्टी और नियमित पानी की जरूरत होती है। बीज से पौधा तैयार होने में 45-60 दिन लगते हैं।
- उचित स्थान का चुनाव. तोरी के लिए ऐसी जगह चुनें जहाँ दिन में कम से कम 6-8 घंटे धूप आती हो। मिट्टी अच्छी जल निकासी वाली होनी चाहिए। यदि आपके पास छत पर गार्डन है तो बड़े गमले या कंटेनर का इस्तेमाल करें।
- मिट्टी की तैयारी. मिट्टी में गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिलाएं। मिट्टी का pH 6.0 से 7.0 के बीच होना चाहिए। यदि मिट्टी कड़ी है तो बालू मिलाकर उसे भुरभुरा बनाएं। रोपाई से 15 दिन पहले खाद डालकर मिट्टी को तैयार कर लें।
- बीज की बुआई. मार्च-अप्रैल या जुलाई-अगस्त में बीज बोएं। बीजों को 2-3 सेमी गहराई में लगाएं और पौधों के बीच 3-4 फीट की दूरी रखें। हर स्थान पर 2-3 बीज बोएं और बाद में सबसे अच्छे पौधे को रख लें।
- सिंचाई व्यवस्था. शुरुआत में हल्का पानी दें। पौधे बड़े होने पर सप्ताह में 2-3 बार पानी दें। मिट्टी नम रहनी चाहिए लेकिन पानी जमा नहीं होना चाहिए। फूल और फल आने के समय पानी की मात्रा बढ़ा दें।
- उर्वरक और देखभाल. हर 15 दिन में गोबर की खाद या कम्पोस्ट डालें। फूल आने के समय NPK उर्वरक का छिड़काव करें। पौधों के आसपास की घास-फूस हटाते रहें और मिट्टी को नरम बनाए रखें।
- कीट-पतंग से बचाव. फल की मक्खी और तना छेदक कीट से बचाव के लिए नीम का तेल का छिड़काव करें। पत्तियों पर सफेद धब्बे दिखें तो फफूंद रोग है - इसके लिए बेकिंग सोडा का घोल स्प्रे करें।
- तुड़ाई. बुआई के 45-60 दिन बाद तोरी तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है। छोटी और कोमल अवस्था में ही तोड़ें। नियमित तुड़ाई से पौधे में नए फल आते रहेंगे। सुबह के समय तुड़ाई करें।