बेसमेंट को अंदर से वाटरप्रूफ कैसे करें

अंदरूनी वाटरप्रूफिंग में दीवारों को साफ करना, दरारें भरना, सीलर लगाना और उचित ड्रेनेज सिस्टम बनाना शामिल है।

  1. दीवारों और फर्श की सफाई और तैयारी. सबसे पहले बेसमेंट से सारा सामान हटाएं और दीवारों व फर्श को अच्छे से साफ करें। पुराने पेंट, गंदगी और फफूंदी को स्क्रैप करके हटा दें। वायर ब्रश या पावर वॉशर का इस्तेमाल करके सतह को पूरी तरह साफ बनाएं।
  2. दरारों और छिद्रों की पहचान और भराई. दीवारों और फर्श में मौजूद सभी दरारों को ध्यान से देखें। छोटी दरारों के लिए हाइड्रॉलिक सीमेंट का इस्तेमाल करें और बड़ी दरारों के लिए पॉलीयूरेथेन या एपॉक्सी इंजेक्शन का उपयोग करें। दरारों को पूरी तरह भरकर 24 घंटे सूखने दें।
  3. प्राइमर लगाना. साफ और सूखी दीवारों पर मेसनरी प्राइमर लगाएं। रोलर या ब्रश का इस्तेमाल करके प्राइमर को समान रूप से फैलाएं। प्राइमर सीलर को बेहतर तरीके से चिपकने में मदद करता है और 4-6 घंटे सूखने दें।
  4. वाटरप्रूफ सीलर लगाना. अच्छी गुणवत्ता का पेनेट्रेटिंग सीलर या क्रिस्टलाइन वाटरप्रूफिंग कंपाउंड लगाएं। पहला कोट ब्रश से लगाकर सभी कोनों और जोड़ों तक पहुंचाएं। 8-12 घंटे बाद दूसरा कोट लगाएं। कुल मिलाकर 2-3 कोट जरूरी हैं।
  5. इंटीरियर ड्रेनेज सिस्टम स्थापित करना. फर्श की परिधि के साथ छोटी नाली खोदें और फ्रेंच ड्रेन सिस्टम बनाएं। पर्फोरेटेड पाइप बिछाकर उसे बजरी से घेरें। इस ड्रेन को पानी निकालने के लिए सम्प पंप से जोड़ें या बाहरी नाले से कनेक्ट करें।
  6. देहुमिडिफायर लगाना. बेसमेंट में नमी कंट्रोल करने के लिए उचित साइज का देहुमिडिफायर लगाएं। इससे हवा में मौजूद अतिरिक्त नमी कम होगी और फफूंदी की समस्या नहीं होगी। नियमित रूप से पानी की टंकी खाली करते रहें।
  7. वेंटिलेशन सुधारना. उचित हवादारी के लिए एक्जॉस्ट फैन लगाएं या मौजूदा वेंटिलेशन को बेहतर बनाएं। खिड़कियां हों तो उन्हें नियमित रूप से खोलते रहें। अच्छी हवा के आवागमन से नमी की समस्या कम होती है।